अपने होंठों पर सजाना चाहती हूँ

अपने होंठों पर सजाना चाहती हूँ
आ तुझे मैं गुनगुनाना चाहती हूँ

कोई आँसू तेरे बाजूओं पर गिराकर
बूँद को मोती बनाना चाहती हूँ

थक गयी मैं करते-करते याद तुझको
अब तुझे मैं याद आना चाहती हूँ

आख़री हिचकी तेरे ज़ानों पे आये
मौत भी मैं शायराना चाहती हूँ