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Gulzar Poetry

सोचा था लिखूंगा तेरे और मेरे वफ़ा के किस्से,
पर यार तूने तो स्याही में ही बेवफ़ाई घोल दी!



बेपनाह चाहने से लेकर बेपरवाह
हो जाने तक का सफर इश्क होता है!


Gulzar Poetry

मेरा पूरा दिन सुस्ती में ही बीत जाता है,
पर जब तुम से मिलता हूँ तो ये दिल स्वस्थ हो जाता है
शायद ये ही इश्क़ है



हो नसीब में तुम पता नही हमे
बस एक उम्मीद पे जीता हुँ।




कुछ बात बिगड़ती सी, कुछ बात सुलझती सी।
कुछ अपनी सी,
कुछ पराई सी
जिंदगी है जनाब,!!!
ये हर रोज साज़ बदलती है।



Gulzar Sahab Quotes


आने वाले जाने वाले हर ज़माने के लिए
आदमी मज़दूर है राहें बनाने के लिए


Gulzar Poetry

"बेरोज़गार" सी हो गई है ज़िन्दगी अपनी
मोहब्बत की नौकरी पर रख लो मुझे



एक हसरत थी कि कभी हमे भी मनाये वो,
पर ये दिल कम्बख्त कभी उनसे रूठा ही नहीं!



Gulzar Poetry

डर लगता है कि कहीं खो ना दूँ तुम्हें,
सच ये भी है कि कभी पाया ही नहीं तुम्हें

Gulzar Quotes



Gulzar Poetry

इस दुनिया मे कोई किसी का हमदर्द नहीं होता,
लाश को शमशान में रखकर अपने लोग ही पुछ्ते हैं।
"और कितना वक़्त लगेगा"

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Gulzar Poetry

मौसम भी कुछ तुम जैसा हो गया है,
इशारों में कुछ और, अदाएं कुछ और पहन रखी है!



"पूरी दुकान बिक जायेगी मुँह-मांगी कीमत पर,
जिस दिन दर्द-ए-दिल की दवा बाज़ार में आयेगी !!"



कौन पूछता है पिंजरे में बंद पंछियों को,
याद वही आते हैं, जो उड़ जाते हैं...!



जान तो वो भी लेता है जो बहुत तड़पाता
और फिर खुद ही मरहम भी बन जाता है!



वो कहती थी कि इन सब दोस्तों के चक्कर में एक दिन मारा जाएगा,
मैंने कहा कि इन यारों के बिना जी कर भी क्या करना है!



मतलब कि दुनिया थी छोड़ दिया सब से मिलना,
वर्ना ये छोटी सी उम्र तन्हाई के काबिल ना थी!



वो जो ख्वाब था मेरे दिल में ना मैं कह सका ना मैं लिख सका,
जुबा मिली तो कटी हुयी कलम मिली तो बिकी हुयी



मेरे ना होने पर भी मुझे महसूस करोगे
मेरे रोने पर भी खुद तड़पोगे
मुझे खोने के बाद मुझे एक दिन मुझे याद करोगे
फिर देखना मिलने की मुझसे तुम फरियाद करोगे



कितना ही कर लो किसी के ख़ातिर,
आख़िर में हमको एक ही बात सुनने को मिलेगी
कि तुमने किया ही क्या है मेरे ख़ातिर!



सूरज के सामने कभी रात नहीं होती,
श्मशान में जाने के बाद मुलाकात नहीं होती

लोगों को देख कर मत आंका करो जनाब,
तुम्हें नहीं पता कि वो खुद के अन्दर
कैसी जंग लड़ रहे हैं

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कुछ हार गयी तकदीर कुछ टूट गए सपने,
कुछ गैरों ने बर्बाद किया कुछ छोड़ गए अपने!



कब छोडेंगी तेरी यादें मुझे....
मैं हर कहीं तुमको ही पाता हूँ,
गम बहुत है मेरे पास....
थोड़े से बेचना चाहता हूं!



तुम पर भी यकीन है मौत का भी ऐतबार है
देखते है तुम दोनों में पहले कौन मिलता है,
मुझे दोनों का इंतजार है!



जिंदगी ने सवाल बदल दिए, समय ने हालत बदल दिए,
हम तो वही है यारों पर लोगो ने अपने ख़्याल बदल दिए!



जिंदगी जीना है तो तकलीफ उठानी पड़ेगी ही,
वरना मरने के बाद जलने का एहसास तक नहीं होता!



नजरों का खेल ही तो था सरकार......
तुम चुरा ना सकी और हम हटा नही सके !!



तुझको पाने की ख्वाहिश दिल मे लेकर घूम रहे है,
बस अपनी हकीकत से यूँ ही रोज मुह मोड रहे है!



तुम बस चलते जाओ..
या तो मंजिल मिल जाएगी या मुसाफिर बन जाओगे!



इम्तिहान में आए मुश्किल सवाल सा हू मैं
हर किसी ने मुझे छोड़ा है बिना समझे ही!



मोहब्बत को बुरा क्यू कहु जब किस्मत ही मेरी खराब है,
वो जा रहे हैं तो जाने दो, मेरे पास मेरी शराब है!



तुझे पा ना सके तो सारी जिंदगी तुझे प्यार करेंगे,
जरूरी तो नहीं जिसको पाया नहीं जा सके उसे छोड़ दिया जाए



आसानी से टूट जाऊ, वो इंसान थोड़ी ना हू,
सब को पसंद आ जाऊ, चाय थोड़ी ना हू!

इस शहर की चकाचौंध में,
हम वो गाँव का सुकून गवा बैठे

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अफवाहों के धुएं वहीं से उड़ते हैं,
जहां तुम्हारे नाम की आग लगी हो!

दर्द को मुस्कुरा कर सहना क्या सीख लिया,
लोग सोचते है कि इसको तो तकलीफ ही नहीं होती!



रखते थे होठों पे उंगलियां जो मरने के नाम से
अफसोस वही लोग मेरे दिल के कातिल निकले



होता होगा तुम्हारे यहां घड़े का पानी मीठा,
हमारे यहां आज भी इश्क़ से मीठा कुछ नहीं!



आप महज़ मिलने का हमसे बहाना तो ढूंढ लो
दुनिया की नजरों में इसे इत्तफ़ाक़ हम साबित कर देंगे...



उसकी बेवफ़ाई की हद तो देखो.....
वो मेरे से मिलने आती है किसी और की दी हुयी पायल पहन कर!



कोई अजनबी खास हो रहा है,
लगता है फिर से मुझे प्यार हो रहा है!



तेरी तस्वीर से भी अब मै सवाल पूछता हूं,
मत पूछ की अब किस किस से मै तेरा हाल पूछता हूँ!



उम्र छोटी है तो क्या जिंदगी का हर मंजर देखा है,
फरेबी मुस्कुराहटे देखी है, बगल में खंजर देखा है!



फिर तुझे कोई और गवारा कैसे हुआ,
मुझे तो नहीं हुआ तुझे ये इश्क़ दोबारा कैसे हुआ।



अपनों से ही सीखा है,
कोई अपना नहीं होता!



लफ्ज तो खामोश हो गए तुमसे बात करते-करते,
अब आंसुओं को जिद है तुमसे बात करने की ...! 👫



क्या बताऊं उसकी बाते कितनी मीठी है,
सामने बैठ कर फीकी चाय पीता रहता हूं....

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तोड़ेंगे गुरूर इश्क़ का इस कदर सुधर जाएंगे,
खड़ी रहेगी मोहब्बत रास्ते में हम सामने से गुजर जायेंगे!



मिजाज में थोड़ी सख्ती जरूरी है जनाब,
लोग पी जाते अगर समुंदर खारा ना होता!



उसको भी मोहब्बत तो है मुझसे,
आज वो चाय बनाना सीख रही थी!



मुश्किल होता है जवाब देना,
जब खामोश रह कर भी सवाल पूछ लेते हैं!



पूरे की ख़्वाहिश में ये इंसान बहुत कुछ खोता है ,
भूल जाता है की आधा चाँद भी ख़ूबसूरत होता है...!!!



मिलो एक बार को तुम
शिदत से एक बात करनी है
तूझ से गले लग कर
तेरी ही शिकायते हजार करनी है.!!



प्यार कब किसका पूरा होता है,
इसका तो पहला अक्षर ही अधूरा होता है!



माना कि आज तक मेरे को किसी का दिल जीतना नहीं आया,
मगर ये तो बताओ कि यहां दिल है किसके पास!



आज परेशान हू कल सुकून आएगा,
खुदा तो मेरा भी है कब तक रुलायेगा!



वो पैरों में काला धागा नहीं पहनती साहेब..
केवल पायल पहन कर ही कहर ढाती है........! 👫



जिस दिन मोहब्बत जतानी हो उसे,
उस दिन काजल गहरा लगाती है वो!



हवा सी थी वो,
आई ओर चली गई!



तरकीबे हजार लगाई उसे मनाने की ,
उसने भी कसम खायी थी नाराज रहने की!



भुल जाना उसे मुश्कील तो नहीं है लेकिन,,,,,,
काम आसान भी हम से कहां होते है,,,,,



गुस्सा भी क्या करूँ तुम पर,
तुम हँसते हुए बेहद अच्छे लगते हो!



ख़ुद को कितना भुला दिया मैंने,
अपने आप को भी अब अजनबी सा लगता हू!



छोटी सी उम्र में हमने भी एक गुनाह कर दिया,
दर्द सहने के बजाय लिखना शुरु कर दिया...!



तुम्हे जो याद करता हुँ, मै दुनिया भूल जाता हूँ ।
तेरी चाहत में अक्सर, सभँलना भूल जाता हूँ ।।



मैं किस्सा हूँ अनसुलझा सा,
अनसुलझी मेरी कहानी है,,
कुछ मेरे टूटे सपने हैं,
और कुछ उनकी मेहरबानी है,!.!



जो बीत गई,फिर वही बात हुई,
मै मिला मुझी में कहीं,ना बात हुई,
ना मुलाकात हुई...!



तुमको ग़म के ज़ज़्बातों से उभरेगा कौन,
ग़र हम भी मुक़र गए तो तुम्हें संभालेगा कौन!.!



हम जैसे लोगो का अब रोना क्या मुस्कुराना क्या,
जब चाहने वाला कोई ना हो तो जीना क्या और मरना क्या....



इश्क हुआ है तुझसे
बस यही खता है मेरी,
तु मोहब्बत है
और तु ही कमजोरी !



तन्हाई अच्छी लगती है
सवाल तो बहुत करती
पर,......
जवाब के लिए
ज़िद नहीं करती...



इतना प्यार दिखती हो.. अच्छा एक बात बताओगी,
कभी तुम्हारे शहर आया तो चाय पिलाओगी?



मैं सारी बहस बस जीतने ही वाला था कि,
उसने दोनों हाथ उठा कर बाल बांधने शुरू कर दिये..❤️



"खता उनकी भी नहीं यारो वो भी क्या करते,
बहुत चाहने वाले थे किस किस से वफ़ा करते !!"



मेरे जो करीबी थे,
कमबख्त वहीं फरेबी थे...!



इश्क़ हो और सुकून भी हो.....
साहब आप होश में तो हो?



हाथ बहुत मुलायम हैं उसके...,
पर चाय बहुत कड़क बनाती है...




मोहब्बत आपनी जगह,
नफरत अपनी जगह
मुझे दोनो है तुमसे .. ☺️



दूर रहना मंजूर नहीं,
साथ रहना तकदीर में नहीं!



वो आज मेरे को जिंदा देख कर बोली,
तुमको बद्दुआ भी नहीं लगती क्या?



तुम सच में मेरी मोहब्बत हो या फिर आँखो का फरेब है,
ना तो दिल से निकलती हो, ना ही जिंदगी मे आती हो !.!




मुझसे तुम बस मोहब्बत कर लिया करो,
नखरे करने में वैसे भी तुम्हारा कोई जवाब नहीं!




ऐसे ही नही बन जाते गैरो से  गहरे रिश्ते,
कुछ खालीपन अपनों ने ही दिया होगा..!!




वैसे मेरा कुछ भी लिखना जायज़ है
उम्मीद ही नहीं करता क़ोई पढे मुझे..💔




जब तुम खामोश
रहते हो...,
कसम से बहुत
शोर करते हो...!!




तजुर्बा कहता है रिश्तों में फैसला रखिए,
ज्यादा नजदीकियां अक्सर दर्द दे जाती है...




खामोशी समझदारी भी है और मजबूरी भी,
कहीं नजदीकियां बढ़ाती है और कही दूरियां...!




तुम लौट कर आने की तकलीफ़ मत करना,
हम एक ही मोहब्बत दो बार नहीं किया करते!




कुछ इस तरह नाराज है वो हमसे,
जैसे उसे किसी और ने मना लिया हो....!




मोहब्बत हो गई है अकेलेपन से,
बच तो जाऊंगा ना......?




तजुर्बा कहता है रिश्तों में फासले रखिए,
ज्यादा नजदीकियां अक्सर दर्द दे जाती है...




तमाशा करती है मेरी जिंदगी,
गजब ये है कि तालियां अपने बजाते हैं!




मजबूरिया ओढ़ के निकलता हूं  घर से आजकल ,
वरना शौक तो आज भी है बारिशों में भीगनें का .....




तकिये पर अश्क़ देख कर सवाल सौ उठे...
हँसकर हमने कह दिया ख्वाबों के दाग हैं....




कुछ इस तरह खूबसूरत रिश्ते टूट जाया करते हैं,
दिल भर जाता है तो लोग रूठ जाया करते हैं....!




वफा की उम्मीद ना करो उन लोगों से,
जो मिलते हैं किसी और से  होते है किसी और के.....!




अपने वजूद पर इतना मत इतरा ऐ जिंदगी,
वो तो मौत है जो तुझे मोहलत दिए जा रही है....!

मुझे जमीर बेचना नहीं आया,
वर्ना दौलत कमाना इतना मुश्किल भी नहीं




हम अपनों से परखे गए हैं कुछ गैरों की तरह,
हर कोई बदलता ही गया हमें शहरों की तरह....!




रखकर तेरे होने पे यकीन ऐ_खुद...!!
हम भी मोहब्बत किसी से बेपनाह कर बैठे..!!!




अहमियत हैसियत को मिलती है,
और हम हैं कि जज्बात लिए फिरते हैं.....!




शिकवे भी हों, शिकायत भी हों,मेरा ऐतबार कर लेना.....!
नज़रों से कभी हो जाऊं ओझल, मेरा इंतजार कर लेना.......!!




लब तो खामोश रहेंगे....ये "वादा" है मेरा  "तुमसे".....
अगर "कह" बैठी ...कुछ "निगाहें" ... तो "खफा" मत होना....!

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