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Gulzar Shayari, Quotes in Hindi Top 100 Gulzar Sahab Poetry Collection

Gulzar Shayari :- Best 200+ Gulzar Quotes - Gulzar Shayari गुलज़ार की लिखी ग़ज़लों से चुनिंदा शेर गुलजार साहब की मशहूर शायरी, Gulzar Shayaris, Gulzar Ki Shayari. Gulzar Shayaris.Two line Gulzar Shayaris

Gulzar Shayari in Hindi


कुछ अलग करना हो तो
भीड़ से हट के चलिए,
भीड़ साहस तो देती हैं
मगर पहचान छिन लेती हैं


आँखों से आँसुओं के मरासिम पुराने हैं
मेहमाँ ये घर में आएँ तो चुभता नहीं धुआँ


शाम से आँख में नमी सी है, आज फिर आप की कमी सी है. 
दफ़्न कर दो हमें के साँस मिले, नब्ज़ कुछ देर से थमी सी है


वो चीज़ जिसे दिल कहते हैं,
हम भूल गए हैं रख के कहीं


सहमा सहमा डरा सा रहता है
जाने क्यूँ जी भरा सा रहता है


हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
वक्त की शाख से लम्हे नहीं तोड़ा करते


मैं दिया हूँ !
मेरी दुश्मनी तो सिर्फ अँधेरे से हैं….
हवा तो बेवजह ही मेरे खिलाफ हैं !

hindi shayari on life by gulzar


इतना क्यों सिखाये
जा रही है ज़िन्दगी
हमें कौन सी सदियाँ
गुज़ारनी है यहाँ

Gulzar Shayari in Hindi


अच्छी किताबें और अच्छे लोग
तुरंत समझ में नहीं आते हैं,
उन्हें पढना पड़ता हैं

Gulzar Shayari in Hindi 2 lines


यूँ भी इक बार तो होता कि समुंदर बहता
कोई एहसास तो दरिया की अना का होता


मिलता तो बहुत कुछ है इस ज़िन्दगी में,
​बस हम गिनती उसी की करते है जो हासिल ना हो सका।


यूँ भी इक बार तो होता कि समुंदर बहता
कोई एहसास तो दरिया की अना का होता


जब भी ये दिल उदास होता है
जाने कौन आस-पास होता है


हाथ छूटें भी तो …
रिश्ते नहीं छोड़ा करते,
वक़्त की शाख़ से…
लम्हे नहीं तोड़ा करते !


हँसता तो मैं रोज़ हूँ
मगर खुश हुए ज़माना हो गया


इतना क्यों सिखाई जा रही हो जिंदगी
हमें कौन से सदिया गुजारनी है यहां


आप के बाद हर घड़ी हम ने
आप के साथ ही गुज़ारी है

Gulzar Shayari in Hindi 2 lines


मैं हर रात सारी ख्वाहिशों को खुद से पहले सुला देता,
हूँ मगर रोज़ सुबह ये मुझसे पहले जाग जाती है।

Gulzar Shayari in Hindi on life


ये रोटियाँ हैं ये सिक्के हैं और दाएरे हैं
ये एक दूजे को दिन भर पकड़ते रहते हैं


कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़
किसी की आंख में हम को भी इंतिज़ार दिखे


भीड़ काफी हुआ करती थी महफ़िल में मेरी..
फिर मैं “सच” बोलता गया और लोग उठते चले गए !


बहुत मुश्किल से करता हु
तेरी यादों का कारोबार
माना मुनाफा कम है
पर गुज़ारा हो जाता है



थोड़ा सा रफू करके देखिए ना
फिर से नई सी लगेगी
जिंदगी ही तो है


दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
जैसे एहसान उतारता है कोई


आइना देख कर तसल्ली हुई, 
हम को इस घर में जानता है कोई।


शाम से आँख में नमी सी है
आज फिर आप की कमी सी है

Gulzar Shayari in Hindi on life



ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में
एक पुराना ख़त खोला अनजाने में

Gulzar Shayari in Hindi on love


कैसे कह दू कि महंगाई बहुत है,
मेरे शहर के चौराहे पर आज भी..
एक रुपये में कई कई दुआएं मिलती है … !


लोग कहते है की खुश रहो
मगर मजाल है की रहने दे


मैं वो क्यों बनु जो तुम्हें चाहिए
तुम्हें वो कबूल क्यों नहीं
जो मैं हूं


आइना देख कर तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई


वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर, 
आदत इस की भी आदमी सी है।


ये दिल भी दोस्त ज़मीं की तरह
हो जाता है डाँवा-डोल कभी


हम ने अक्सर तुम्हारी राहों में
रुक कर अपना ही इंतिज़ार किया


कुछ जख्मों की उम्र नहीं होती हैं,
ताउम्र साथ चलते हैं,
जिस्मों के ख़ाक होने तक !

Gulzar Shayari in Hindi on love

मिलता तो बहुत कुछ है
ज़िन्दगी में
बस हम गिनती उन्ही की
करते है जो हासिल न हो सका

Gulzar Shayari in Hindi love


बहुत छाले हैं उसके पैरों में
कमबख्त उसूलो पर चल होगा



तुम्हारी ख़ुश्क सी आँखें भली नहीं लगतीं
वो सारी चीज़ें जो तुम को रुलाएँ, भेजी हैं


ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा, 
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा।


फिर वहीं लौट के जाना होगा
यार ने कैसी रिहाई दी है



जिस की आंखों में कटी थीं सदियां
उस ने सदियों की जुदाई दी है



आइना देख कर तसल्ली हुई …
हमको इस घर में जानता है कोई !


दिन कुछ ऐसे गुजारता है कोई
जैसे एहसान उतारता है कोई


सुनो…
जब कभी देख लुं तुमको
तो मुझे महसूस होता है कि
दुनिया खूबसूरत है


हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते

Gulzar Shayari in Hindi love


हम ने अक्सर तुम्हारी राहों में, 
रुक कर अपना ही इंतिज़ार किया।

Zindagi Gulzar Shayari in Hindi


यादों की बौछारों से जब पलकें भीगने लगती हैं
सोंधी सोंधी लगती है तब माज़ी की रुस्वाई भी


फिर वहीं लौट के जाना होगा
यार ने कैसी रिहाई दी है


कौन कहता है जनाव, हम झूट नहीं बोलते,
एक बार खैरियत पूछ कर तो देखिये !


सहम सी गयी है
ख्वाइशे
ज़रूरतों ने शायद उन से
ऊँची आवाज़ में बात की होगी


मैं दिया हूँ
मेरी दुश्मनी तो सिर्फ अँधेरे से हैं
हवा तो बेवजह ही मेरे खिलाफ हैं


ज़मीं सा दूसरा कोई सख़ी कहाँ होगा
ज़रा सा बीज उठा ले तो पेड़ देती है

Zindagi Gulzar Shayari in Hindi


आप के बाद हर घड़ी हम ने,
आप के साथ ही गुज़ारी है।

Gulzar Shayari in Hindi images


रात गुज़रते शायद थोड़ा वक़्त लगे
धूप उन्डेलो थोड़ी सी पैमाने में


सहमा सहमा डरा सा रहता है
जाने क्यूं जी भरा सा रहता है


दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई,
जैसे एहसान उतारता है कोई !


कौन कहता है की
हम झूठ नहीं बोलते
एक बार तुम खेरियत
पूछ कर तो देखो


बहुत अंदर तक जला देती हैं,
वो शिकायते जो बया नहीं होती


काँच के पीछे चाँद भी था और काँच के ऊपर काई भी
तीनों थे हम वो भी थे और मैं भी था तन्हाई भी


फिर वहीं लौट के जाना होगा,
यार ने कैसी रिहाई दी है।


हम ने अक्सर तुम्हारी राहों में
रुक कर अपना ही इंतिज़ार किया

Gulzar Shayari in Hindi images



मैं चुप कराता हूं हर शब उमड़ती बारिश को
मगर ये रोज़ गई बात छेड़ देती है

Gulzar Shayari in Hindi pdf


शोर की तो उम्र होती हैं….
ख़ामोशी तो सदाबहार होती हैं !


गुलाम थे तो
हम सब हिंदुस्तानी थे
आज़ादी ने हमें
हिन्दू मुसलमान बना दिया


एक सपने के टूटकर चकनाचूर हो जाने के बाद
दूसरा सपना देखने के हौसले का नाम जिंदगी हैं


खुली किताब के सफ़्हे उलटते रहते हैं
हवा चले न चले दिन पलटते रहते है


कुछ अलग करना हो तो भीड़ से हट के चलिए, 
भीड़ साहस तो देती हैं मगर पहचान छिन लेती हैं।


वो उम्र कम कर रहा था मेरी
मैं साल अपने बढ़ा रहा था


खाली कागज़ पे क्या तलाश करते हो?
एक ख़ामोश-सा जवाब तो है।

Gulzar Shayari in Hindi pdf



वो मोहब्बत भी तुम्हारी थी
वो नफ़रत भी तुम्हारी थी
हम अपनी वफ़ा का इंसाफ किससे मांगते
वो शहर भी तुम्हारा था
वो अदालत भी तुम्हारी थी

Gulzar Shayari in Hindi font


तकलीफ़ ख़ुद की कम हो गयी,
जब अपनों से उम्मीद कम हो गईं


शाम से आँख में नमी सी है
आज फिर आप की कमी सी है


अच्छी किताबें और अच्छे लोग, तुरंत समझ में नहीं आते, 
उन्हें पढना पड़ता हैं।


तुम्हारे ख़्वाब से हर शब लिपट के सोते हैं
सज़ाएँ भेज दो हम ने ख़ताएँ भेजी हैं


दर्द की भी अपनी एक अदा है,
वो भी सहने वालों पर फ़िदा है!

Gulzar Shayari in Hindi font



तेरे बिना ज़िन्दगी से कोई
शिकवा तो नहीं
तेरे बिना पर ज़िन्दगी भी लेकिन
ज़िन्दगी तो नहीं

Best of Gulzar Shayari in Hindi



घर में अपनों से उतना ही रूठो
कि आपकी बात और दूसरों की इज्जत,
दोनों बरक़रार रह सके


वो उम्र कम कर रहा था मेरी
मैं साल अपने बढ़ा रहा था


बहुत अंदर तक जला देती हैं, 
वो शिकायते जो बया नहीं होती।



उसी का ईमाँ बदल गया है
कभी जो मेरा ख़ुदा रहा था


आज की रात यूँ थमी सी है …
आज फिर आपकी कमी सी है… !

Best of Gulzar Shayari in Hindi


गए थे सोचकर की बात
बचपन की होगी
मगर दोस्त मुझे अपनी
तरक्की सुनाने लगे


कौन कहता हैं कि हम झूठ नहीं बोलते
एक बार खैरियत तो पूछ के देखियें


कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था
आज की दास्ताँ हमारी है


मैंने दबी आवाज़ में पूछा? मुहब्बत करने लगी हो?
नज़रें झुका कर वो बोली! बहुत।


वो एक दिन एक अजनबी को
मिरी कहानी सुना रहा था


तकलीफ़ ख़ुद की कम हो गयी,
जब अपनों से उम्मीद कम हो गईं !

Gulzar Shayari in Hindi



याद आएगी हर रोज़ मगर
तुझे आवाज़ ना दूँगा
लिखूँगा तेरे ही लिए हर ग़ज़ल
मगर तेरा नाम ना लूँगा


कुछ बातें तब तक समझ में नहीं आती
जब तक ख़ुद पर ना गुजरे


काई सी जम गई है आँखों पर
सारा मंज़र हरा सा रहता है


कोई पुछ रहा हैं मुझसे मेरी जिंदगी की कीमत,
मुझे याद आ रहा है तेरा हल्के से मुस्कुराना।


मैं चुप कराता हूँ हर शब उमडती बारिश को
मगर ये रोज़ गई बात छेड़ देती है


चूल्हे नहीं जलाए कि बस्ती ही जल गई,
कुछ रोज़ हो गए हैं…अब उठता नहीं धुआँ !

Gulzar Shayari in Hindi 2 lines



उम्र जाया कर दी लोगो ने
औरों में नुक्स निकालते निकालते
इतना खुद को तराशा होता
तो फरिश्ते बन जाते


शायर बनना बहुत आसान हैं
बस एक अधूरी मोहब्बत की मुकम्मल डिग्री चाहिए


उठाए फिरते थे एहसान जिस्म का जाँ पर
चले जहाँ से तो ये पैरहन उतार चले


मैं दिया हूँ! मेरी दुश्मनी तो सिर्फ अँधेरे से हैं, 
हवा तो बेवजह ही मेरे खिलाफ हैं।


ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा


अपने साए से भी चौंक जाते हैं …
उम्र गुज़री है इस क़दर तन्हा…


मैं हर रात ख्वाईशो को
खुद से पहले सुला देता हु
हैरत यह है की हर सुबह
ये मुझसे पहले जग जाती है

Gulzar Shayari in Hindi on life



वो चीज़ जिसे दिल कहते हैं,
हम भूल गए हैं रख के कहीं


सहर न आई कई बार नींद से जागे
थी रात रात की ये ज़िंदगी गुज़ार चले


बिगड़ैल हैं ये यादे, 
देर रात को टहलने निकलती हैं।


ज़ख़्म कहते हैं दिल का गहना है
दर्द दिल का लिबास होता है


आँखों से आँसुओं के मरासिम पुराने हैं,
मेहमाँ ये घर में आएँ तो चुभता नहीं धुआँ !


तेरे जाने से तो कुछ बदला नहीं,
रात भी आयी और चाँद भी था, मगर नींद नहीं


कोई न कोई रहबर रस्ता काट गया
जब भी अपनी रह चलने की कोशिश की


Gulzar Shayari in Hindi on love


सुना हैं काफी पढ़ लिख गए हो तुम, 
कभी वो भी पढ़ो जो हम कह नहीं पाते हैं।


ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में
एक पुराना ख़त खोला अनजाने में


मीलो का सफर, पल में बर्बाद कर गया,
उसका ये कहना… कहो कैसे आना हुआ !!


कभी तो चौक के देखे वो हमारी तरफ़,
किसी की आँखों में हमको भी वो इंतजार दिखे


कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ
उन से कितना कुछ कहने की कोशिश की


उसने कागज की कई कश्तिया पानी उतारी और, 
ये कह के बहा दी कि समन्दर में मिलेंगे।

Gulzar Shayari in Hindi love



कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है
ज़िंदगी एक नज़्म लगती है


वही दीये हाथो को जला देते है…
जिसको हम हवा से बचा रहे होते है…!!


कैसे करें हम ख़ुद को
तेरे प्यार के काबिल,
जब हम बदलते हैं,
तो तुम शर्ते बदल देते हो


कोई अटका हुआ है पल शायद
वक़्त में पड़ गया है बल शायद


कभी जिंदगी एक पल में गुजर जाती हैं, 
और कभी जिंदगी का एक पल नहीं गुजरता।


ज़िंदगी पर भी कोई ज़ोर नहीं
दिल ने हर चीज़ पराई दी है


बहुत अंदर तक जला देती हैं,
वो शिकायते जो बया नहीं होती !

Zindagi Gulzar Shayari in Hindi



किसी पर मर जाने से होती हैं मोहब्बत,
इश्क जिंदा लोगों के बस का नहीं


आ रही है जो चाप क़दमों की
खिल रहे हैं कहीं कँवल शायद


हम तो अब याद भी नहीं करते,
आप को हिचकी लग गई कैसे?


दिल पर दस्तक देने कौन आ निकला है
किस की आहट सुनता हूँ वीराने में


पलक से पानी गिरा है तो उसे गिरने दो,
कोई पुरानी तम्मना पिघल रही होगी !


तन्हाई की दीवारों पर
घुटन का पर्दा झूल रहा हैं,
बेबसी की छत के नीचे,
कोई किसी को भूल रहा हैं


दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई,
जैसे एहसान उतारता है कोई।


हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते


ज़िन्दगी ये तेरी खरोंचे है मुझ पर, 
या तू मुझे तराशने की कोशिश में है !


शोर की तो उम्र होती हैं
ख़ामोशी तो सदाबहार होती हैं


रोई है किसी छत पे, अकेले ही में घुटकर,
उतरी जो लबों पर तो वो नमकीन थी बारिश।

Gulzar Shayari in Hindi images



कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था
आज की दास्ताँ हमारी है


तुझे बेहतर बनाने की कोशिश में,
तुझे से वक्त नहीं दे पा रहे हम !



वक्त रहता नहीं कही भी टिक कर,
आदत इसकी भी इंसान जैसी हैं


दिल अगर हैं तो दर्द भी होंगा, 
इसका शायद कोई हल नहीं हैं।


ख़ामोशी का हासिल भी इक लम्बी सी ख़ामोशी थी
उन की बात सुनी भी हम ने अपनी बात सुनाई भी


माफ़ करना ए ज़िन्दगी,
तुझे ही नहीं जी पा रहे हम !


हाथ छुटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते,
वक्त की शाख से लम्हें नहीं तोडा करते


कभी तो चौक के देखे कोई हमारी तरफ़, 
किसी की आँखों में हमको भी को इंतजार दिखे।


वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर
आदत इस की भी आदमी सी है


थोड़ा सा रफू करके देखिये ना…
फिर से नयी सी लगेगी
आखिर ज़िन्दगी ही तो है…


दिल अगर हैं तो दर्द भी होंगा,
इसका शायद कोई हल नहीं हैं

तेरे जाने से तो कुछ बदला नहीं, 
रात भी आयी और चाँद भी था, मगर नींद नहीं।



आँखों के पोछने से लगा आग का पता
यूँ चेहरा फेर लेने से छुपता नहीं धुआँ


लगता है ज़िन्दगी आज खफा है ….
चलिए छोड़िये, कोनसी पहली दफा है !


एक बार तो यूँ होगा, थोड़ा सा सुकून होगा
ना दिल में कसक होगी, ना सर में जूनून होगा


वो चीज़ जिसे दिल कहते हैं, 
हम भूल गए हैं रख के कहीं।


एक ही ख़्वाब ने सारी रात जगाया है
मैं ने हर करवट सोने की कोशिश की


वक़्त रहता नहीं कही टिक कर
आदत इसकी भी आदमी सी है


लकीरें हैं तो रहने दो
किसी ने रूठ कर गुस्से में शायद खींच दी थी
उन्ही को अब बनाओ पाला, और आओ कबड्डी खेलते हैं


शायर बनना बहुत आसान हैं,
बस एक अधूरी मोहब्बत की मुकम्मल डिग्री चाहिए।


एक सन्नाटा दबे-पाँव गया हो जैसे
दिल से इक ख़ौफ़ सा गुज़रा है बिछड़ जाने का


धागे बड़े कमजोर चुन लेते हैं हम,
और फिर पूरी उम्र गांठ बंधने में ही निकल जाती है !!


छोटा सा साया था, आँखों में आया था
हमने दो बूंदों से मन भर लिया


कुछ बातें तब तक समझ में नहीं आती, 
जब तक ख़ुद पर ना गुजरे।


राख को भी कुरेद कर देखो
अभी जलता हो कोई पल शायद


एक सपने के टूट कर चकनाचूर हो जाने के बाद,
दूसरे सपने देखने के हौंसले को ज़िन्दगी कहते हैं!


सामने आया मेरे, देखा भी, बात भी की
मुस्कुराए भी किसी पहचान की खातिर
कल का अखबार था, बस देख लिया, रख भी दिया


हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उनको, 
क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया?


आँखों से आँसुओं के मरासिम पुराने हैं
मेहमाँ ये घर में आएँ तो चुभता नहीं धुआँ


ज़िन्दगी हर पल ढलती है, जैसे रेत मुट्ठी से फिसलती है,
शिकवे कितने भी हो किसी से, फिर भी मुस्कराते रहना,
क्योंकि ये ज़िन्दगी जैसी भी है, बस एक ही बार मिलती है।


बेहिसाब हसरते ना पालिये
जो मिला हैं उसे सम्भालिये


कुछ जख्मो की उम्र नहीं होती हैं, 
ताउम्र साथ चलते हैं, जिस्मो के ख़ाक होने तक।


आदतन तुम ने कर दिए वादे
आदतन हम ने ए’तिबार किया


ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा …
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा ..!



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