गुलज़ार शायरी

gulzar poetry

आज परेशान हू कल सुकून आएगा,

खुदा तो मेरा भी है कब तक रुलायेगा!

gulzar poetry

वो पैरों में काला धागा नहीं पहनती साहेब..

केवल पायल पहन कर ही कहर ढाती है……..! 👫

gulzar poetry

जिस दिन मोहब्बत जतानी हो उसे,

उस दिन काजल गहरा लगाती है वो!

gulzar poetry

हवा सी थी वो,

आई ओर चली गई!

gulzar poetry

तरकीबे हजार लगाई उसे मनाने की ,

उसने भी कसम खायी थी नाराज रहने की!

gulzar poetry

भुल जाना उसे मुश्कील तो नहीं है लेकिन,,,,,,

काम आसान भी हम से कहां होते है,,,,,