गुलज़ार शायरी

gulzar poetry

“खता उनकी भी नहीं यारो वो भी क्या करते,

बहुत चाहने वाले थे किस किस से वफ़ा करते !!”

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मेरे जो करीबी थे,

कमबख्त वहीं फरेबी थे…!

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इश्क़ हो और सुकून भी हो…..

साहब आप होश में तो हो?

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हाथ बहुत मुलायम हैं उसके…,

पर चाय बहुत कड़क बनाती है…

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मोहब्बत आपनी जगह,
नफरत अपनी जगह
मुझे दोनो है तुमसे .. ☺️

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दूर रहना मंजूर नहीं,

साथ रहना तकदीर में नहीं!