गुलज़ार शायरी

gulzar poetry

वो आज मेरे को जिंदा देख कर बोली,

तुमको बद्दुआ भी नहीं लगती क्या?

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तुम सच में मेरी मोहब्बत हो या फिर आँखो का फरेब है,

ना तो दिल से निकलती हो, ना ही जिंदगी मे आती हो !.!

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मुझसे तुम बस मोहब्बत कर लिया करो,

नखरे करने में वैसे भी तुम्हारा कोई जवाब नहीं!

gulzar poetry

ऐसे ही नही बन जाते गैरो से  गहरे रिश्ते,

कुछ खालीपन अपनों ने ही दिया होगा..!!

gulzar poetry

वैसे मेरा कुछ भी लिखना जायज़ है

उम्मीद ही नहीं करता क़ोई पढे मुझे..💔

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जब तुम खामोश

रहते हो…,

कसम से बहुत

शोर करते हो…!!