गुलज़ार शायरी

gulzar poetry

तजुर्बा कहता है रिश्तों में फैसला रखिए,

ज्यादा नजदीकियां अक्सर दर्द दे जाती है…

gulzar poetry

खामोशी समझदारी भी है और मजबूरी भी,

कहीं नजदीकियां बढ़ाती है और कही दूरियां…!

gulzar poetry

तुम लौट कर आने की तकलीफ़ मत करना,

हम एक ही मोहब्बत दो बार नहीं किया करते!

gulzar poetry

कुछ इस तरह नाराज है वो हमसे,

जैसे उसे किसी और ने मना लिया हो….!

gulzar poetry

मोहब्बत हो गई है अकेलेपन से,

बच तो जाऊंगा ना……?

gulzar poetry

तजुर्बा कहता है रिश्तों में फासले रखिए,

ज्यादा नजदीकियां अक्सर दर्द दे जाती है…