गुलज़ार शायरी

gulzar poetry

जान तो वो भी लेता है जो बहुत तड़पाता

और फिर खुद ही मरहम भी बन जाता है!

gulzar poetry

वो कहती थी कि इन सब दोस्तों के चक्कर में एक दिन मारा जाएगा,

मैंने कहा कि इन यारों के बिना जी कर भी क्या करना है!

gulzar poetry

मतलब कि दुनिया थी छोड़ दिया सब से मिलना,

वर्ना ये छोटी सी उम्र तन्हाई के काबिल ना थी!

gulzar poetry

वो जो ख्वाब था मेरे दिल में ना मैं कह सका ना मैं लिख सका,

जुबा मिली तो कटी हुयी कलम मिली तो बिकी हुयी

gulzar poetry

मेरे ना होने पर भी मुझे महसूस करोगे

मेरे रोने पर भी खुद तड़पोगे

मुझे खोने के बाद मुझे एक दिन मुझे याद करोगे

फिर देखना मिलने की मुझसे तुम फरियाद करोगे

gulzar poetry

कितना ही कर लो किसी के ख़ातिर,

आख़िर में हमको एक ही बात सुनने को मिलेगी

कि तुमने किया ही क्या है मेरे ख़ातिर!