प्रेम कविताएं

Love Poem

Love Poem In Hindi

कुछ कमी रह गई

इतनी खूबियाें के बावजूद एक कमी रह गई
वो महल था शानदार मगर बुनियाद में नमी रह गई

यूँ तो बने हैं सूरज चाँद सितारे भी कायनात में
लेकिन अँधेराें में सिर्फ चिराग़ाें की राेशनी रह गई

मिसाल है या सवाल ये दुनिया, वक़्त आैर ये आलम
क्या करे इंसा जब उलझी इन्हीं में ज़िंदगी रह गई

लिखे गए फ़लसफ़े फ़रिश्ताें के छाेटी बड़ी किताबाें में
फिर भी इल्म की तासीर में तहरीर दबी रह गई

बदल दी आबाे-हवा तारीख़ाें ने बग़ावत से
हर लम्हा घायल आदमी आदमी की दुश्मनी रह गई


साेचता रह गया

साेचते साेचते साेचता रह गया
रास्ता था मगर खाेजता रह गया

चल पड़े थे कदम फिर उसी माेड़ से
फिर उसी माेड़ से वास्ता रह गया

छाेड़ कर साथ सब दूर जाने लगे
आैर मैं था खड़ा देखता रह गया

भूल कर दास्ताँ दिल मुक़म्मल हुआ
काैन था जो हमें पूछता रह गया

झूठ जल्दी मिला सच मिला देर से
काेइ था जो मुझे लूटता रह गया

टूट कर ज़िंदगी जब बिखरने लगी
रात दिन मैं उसे जाेड़ता रह गया

हाे गए लापता फिर कभी ना मिले
इस तरह उम्र मैं काटता रह गया 


Best Love Poems Hindi

परवरदिगार आलम

बड़े बड़े दरख़्ताें को गिराने वाला तूफ़ान
छाेटे पाैधे से डर गया
बड़ा गुरूर था उसे अपनी ताकत का
एक तिनका आँख में पड़ गया

पूरी दुनिया काे राैशनी देने वाला सूरज
कैद हाेता है राेज़ अँधेराें में
सुनामियाें से तबाही मचाने वाला समुंदर
सिमटा रहता है साहिलाें के घेराें में

कदमाें की ठाेकराें से राहें मुस्कुराती हैं
उगलती हैं मंज़िल जब घायल हो जाती हैं

सबकुछ खाेने के बाद भी काेशिश अपनी जारी है
शिकस्त खाकर फिर लड़े तब जाकर बाजी मारी है

ज़िंदगी जीना आसान नहीं ज़माने की दहलीज़ पे
बिगड़ जाती है सूरत जब कीचड़ पड़ता है कमीज़ पे


हम क्या हैं हमीं जानते हैं – Love Poem In Hindi

हम क्या हैं ये हमीं जानते हैं
सब्र करते हैं सब काे मानते हैं

बड़े तंज़ कसते हैं लाेग हमारे ऊपर
उन्हें क्या पता हम कायनात थामते हैं

देते हैं सहारा जिसकाे भी ज़माने में
फ़रिश्ते भी उस शख़्स को पहचानते हैं

झुका लेते हैं सर हर मज़हब के आगे
यही इल्म ख़ानदानी परवरिश की अमानतें हैं

अगर मुद्दा है कि रूतबा कैसे बना
ताे हम सिर्फ परवरदिगार से माँगते हैं

मिलती है इतनी माेहब्बतें आप सभी से
देते हैं दुआएं आपको नेकियाें से बाँधते हैं


Love Poems In Hindi

हताश जिंदगी

जाे मेरा था ही नहीं
वही मेरे पास है
काेई ग़म नहीं फिर भी
एक कसक तो दिन-रात है
रखे हैं आँसू आँखों में
पलकें बहुत उदास हैं
बह रहा है दरिया मुझमें
सूखे मेरे लिबास हैं
कभी कभी तो लगता है
ये कैसा मज़ाक है
पाँव ज़मीं पर रखता हूँ
नज़र छिपाती राज़ है
चूम लिया है दर्द ने मुझको
पागल है बदहवास है
जुदा ना हाेगा उम्र से पहले
इतनी उसकी प्यास है
ग़ुम हूँ इतना गहरे में
इक अंजानी तलाश है
खाेज रहा हूँ खुद में खुद को
ज़िंदगी हताश है
दिल की बात किसे बताते
काैन यहाँ पर ख़ास है
अफ़वाह उड़ेगी ज़माने में
इतना हमें एहसास है


सब है पर वही नहीं- Love Poem In Hindi

माना कि कोई कमी नहीं
सब है पर वही नहीं

रह गई बस जाते जाते
इक साेच है जो दबी नहीं

ये साेच भी एक मर्ज़ है
अभी दवा इस की बनी नहीं

और दर्द है उस दर्द का
कभी चाेट जिस की लगी नहीं

काैन क्या है इसी फ़िक्र में
किसी को फ़िक्र खुद की नहीं


Love Poems In Hindi

पहली मुलाक़ात – First Date

धड़क रहा दिल चाहत है मुलाक़ात की
माैसम है सुहाना बादलाें ने बरसात की

बहुत तेज रफ़्तार खून की बदन में
पहली बार उनसे आज हमने बात की

अटकती रही आवाज़ इधर उधर देखते रहे
खामाेश थी ज़ुबाँ उनके भी अल्फ़ाज़ की

बैठा था इश्क़ दिमाग़ के दयार में
काँपती हुई निकली हालत हर जज़्बात की

डरी सहमी वो भी बाेल पड़ी आख़िर
माेहब्बत है जुनून इसमें जरूरत एहतियात की

मिल गई तसल्ली पूरा पूरा आराम मिला
शर्त जब उसने रखी राेज़ मुलाक़ात की

गुज़र गया दिन रात बाकी है अभी
शाम का इशारा राेशनी हाे चराग़ की

जाने लगी वो पाबन्दी बताकर वक़्त की
थमी थमी रह गई धड़कन बस हयात की


भुलाने का तरीक़ा निकाला है- Love Poem In Hindi

थाेड़ी सी शराब हलक में डाला है
तुझे भुलाने का तरीक़ा निकाला है

हाेश है मुझे अपनी बेख़ुदी का
मयख़ाने के बाहर ग़ैराें ने सँभाला है

लापता हूँ मैं पता नहीं कब से
काेई हमें घर पहुँचाने वाला है

गुम है बटुआ नाेटाें से भरा हुआ
याद नहीं किसने जेब मेरी खँगाला है

घूम रहा सूरज गर्मी है शबाब पर
झुलस गया बदन पसीने ने उबाला है

बन गई वाे किसी आैर की दुल्हन
अफ़सोस यही सदमा ज़िंदगी ने पाला है


Love Poem In Hindi

थाेड़ी सी अच्छाई कर दी

मर्ज़ था पुराना आज अपनी दवाई कर दी
धुल दिया दिल दिमाग़ की सफ़ाई कर दी

चमक उठा बदन रूह ताज़ा हो गई
चुन चुन कर हमने दूर हर बुराई कर दी

मिल गया सुकून घर में बरकत आ गई
जबसे बंद हमने रिश्वत की कमाई कर दी

जाने लगा हर शख़्स नाराज़ हाेकर हमसे
जब जब बयाँ मैने शरीफ़ाें की सच्चाई कर दी

लगा देता हूँ पाैधे खाली पड़ी ज़मीनाें में
कुछ इसी तरह मैंने थाेड़ी सी अच्छाई कर दी


ये हादसा हाेने वाला था…- Love Poem In Hindi

ये हादसा इक राेज़ हाेने वाला था
अपनी मज़ार में मैं साेने वाला था

जगा लाया हूँ खुद को गहरी नींद से
वर्ना ये मजमा यहीं राेने वाला था

बना दिया फ़क़ीर बुलंदियाें की चाहत ने
क्या बताऊँ क्या क्या मैं खाेने वाला था

उग आए पेड़ मेरे घर की दीवारों में
इसी खंडहर में कमरा मेरा काेने वाला था

झाँकने लगा बचपन यादाें के झराेखाें से
उसी नुक्कड़ पे वो चाचा खिलाैने वाला था

सिसक सिसक कर लिपटकर चूमकर सारा कुनबा
अश्क़ाें से बदन मेरा धाेने वाला था

चिटक गया दिल आह तक ना कह सके
बस यही खामाेशी मैं ढाेने वाला था


Hindi Poems

मन की आँखें- Love Poem In Hindi

मैं हार गया अपनी इंन्द्रियाें से
मेरा पुरुषार्थ भी हारा है
वश में नहीं मन कई जन्माें से
मुझे भौतिकता ने मारा है

यथार्थ से विचलित इच्छाओं की शाखा
अनगिनत दृष्टिकोण है
जीव जगत परमात्मा के भेद निःसंदेह
चेतना का जाेड़ है

विचित्र रंगमंच है पृथ्वी शरीरधारियाें की
जबकि यही मृत्युलाेक है
काम क्राेध लाेभ धारण करे हृदय अपितु
तत्काल प्रसन्नता फिर शाेक है

संभव है शुद्धता चित्त की अंतर्मन में
किंतु शुद्ध भाव हाे
हानि लाभ सुख दुःख में बुद्धि से
समता का प्रभाव हो

रक्त माँस मज्जा की काया
पंचतत्व का अनुपात है
प्रकृति के अद्भुत काेष में
सबका जीवन व्याप्त है

निरंतरता समाहित है जिसमें
सबकुछ उसके आधीन है
ज्ञान कहे विज्ञान कहे
एक मात्र समय स्वाधीन है


दिल की हलचल- Love Poem In Hindi

मेरे धड़कन की चाैखट पे
ये दस्तक काैन सी आई
हुआ एहसास ये दिल को
माेहब्बत ली है अँगड़ाई

अजब ये खेल है कैसा
न जानाे तुम न जाने हम
सुना है इश्क़ वालाें को
तड़पना पड़ता है हरदम
ज़िगर के पास की हलचल
बयाँ करती है रूसवाई
मेरे धड़कन की चाैखट पे
ये दस्तक काैन सी आई

मुझे राेक लाे पहलू में अपने
अब न जाने दो
यही ख्वाहिश आख़िरी है
तमन्नाआें को पाने दो
सकूँ मिलता है चाहत काे
कि जैसे जाँ ने जाँ पाई
मेरे धड़कन की चाैखट पे
ये दस्तक काैन सी आई

हमें मालूम है एक दिन
हम से तुम जुदा हाेगी
न जी पायेंगे बिन तेरे
तुम्हारी दी सज़ा हाेगी
कटेगी उम्र ये तन्हा
रहेगी साथ परछाँई
मेरे धड़कन की चाैखट पे
ये दस्तक काैन सी आई

ये मेरा हाल तो देखो
नज़र भर के गुज़ारिश है
बना हूँ एैसा बंजर मैं
न फ़सलें हैं न बारिश है
मेरे प्यासे हलक से फिर
काेई आवाज़ ना आई
मेरे धड़कन की चाैखट पे
ये दस्तक काैन सी आई

हमें धाेखा ही मिलता है
ये कैसी ज़िंदगानी है
जो पाया है गँवाया है
मेरी किस्मत वीरानी है
मेरी दुखती रगाें पर फिर
किसी ने चाेट पहुँचाई
मेरे धड़कन की चाैखट पे
ये दस्तक काैन सी आई
हुआ एहसास ये दिल को
माेहब्बत ली है अँगड़ाई


Love Poem in Hindi

सजा माेहब्बत की

माेहब्बत करके पछताते हैं
दर दर की ठाेकर खाते हैं
मायूस कर गई वाे जिंदगी मेरी
छिपा के ग़म मुस्कुराते हैं
माेहब्बत करके पछताते हैं

दबी हैं यादें आज तक जहन में
जगाती हैं नीदें अचानक वहम में
दर्द दीवारों से बताते हैं
माेहब्बत करके पछताते हैं

रह रह के ख्याल आता जाता है
घाव पुराना दिल्लगी अजमाता है
चाेट गहरी छिपाते हैं
माेहब्बत करके पछताते हैं

पूछती हैं गलियां वो वादे वो इरादे
दुखता है ज़िगर रह जाते हैं आधे
आह चाहत की दिखाते हैं
माेहब्बत करके पछताते हैं

गुज़रते हैं जब जमाने की निगाहाें से
कहते हैं पागल सब हटाते हैं राहाें से
मजनू मजनू कहकर सताते हैं
माेहब्बत करके पछताते हैं

Leave a Reply

Bitnami