BEWAFA SHAYARI, BEWAFA SHAYARI IN HINDI, बेवफा शायरी, बेवफाई शायरी

आज हम एक बार फिर से आपके लिए शायरियों के पिटारे में से कुछ शायरी आपके लिए लेकर आएं हैं। दुनिया में शायरी के प्रेमी काफी सारे हैं। बहुत ऐसे लोग हैं जिन्हें शायरी पसंद होती है। कुछ तो ऐसे भी लोग हैं जो शायरी लिखते भी हैं। उन्हें शायरी लिखने का बेहद शौक होता है।

आज हम आपके लिए ऐसे ही कुछ बेवफाई की शायरी आपके लिए लेकर आएं हैं। इन शायरियों में बहुत दर्द है तो आपके दर्द को एक बार फिर तरो ताजा कर सकता है। लेकिन जरूरी नहीं कि यह शायरियां दर्द में ही सुनी जाएं हम इन शायरियों को खुशी में भी सुन सकते हैं। चलिए शायरियों पर एक बार  नजर डालते हैं।

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For every Sad Lover, today i am sharing some collective Bewafa Shayari that will give you that energy or strenght to face that betrayal situation. So choose your appropriate Bewafa Shayari down below.



ये चिराग-ए-जान भी अजीब है, 
कि जला हुआ है अभी तलक, 
उसकी बेवफाई की आँधियाँ तो, 
कभी की आ के गुजर गईं।
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कभी जो हम से प्यार बेशुमार करते थे, 
कभी जो हम पर जान निसार करते थे, 
भरी महफ़िल में हमको बेवफा कहते हैं, 
जो खुद से ज़्यादा हमपर ऐतबार करते थे। 

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ये उनकी मोहब्बत का नया दौर है, 
जहाँ कल मैं था आज कोई और है।

 जो कहते थे हमसे हैं तेरे सनम, 
वो दगा दे गए देखते देखते। 
देते मोहब्बत का इनाम क्या, 
वो सजा दे गए देखते देखते। 
सोचता हूँ कि वो कितने मासूम थे , 
जो बेवफा हो गए देखते देखते।

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न रहा कर उदास ऐ दिल 
किसी बेवफा की याद में, 
वो खुश है अपनी दुनिया में 
तेरा सबकुछ उजाड़ के।

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किस-किस को तू खुदा बनाएगी, 
किस-किस की तू हसरतें मिटाएगी, 
कितने ही परदे डाल ले गुनाहों पे, 
बेवफा तू बेवफा ही नजर आएगी।


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ट्रैफिक सिग्नल पर आज उसकी याद आ गई, 
रंग उसने भी अपना कुछ इसी तरह बदला था।

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बेवफा से दिल लगा लिया नादान थे हम, 
गलती हमसे हुई क्योंकि इंसान थे हम, 
आज जिन्हें नज़रें मिलाने में तकलीफ होती है, 
कुछ समय पहले उनकी जान थे हम।

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छोड़ गए हमको वो अकेले ही राहों में, 
चल दिए रहने वो औरों की पनाहों में, 
शायद मेरी चाहत उन्हें रास नहीं आई, 
तभी तो सिमट गए वो गैर की बाहों में।

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एक बेवफा से प्यार का अंजाम देख लो, 
मैं खुद ही शर्मशार हूँ उससे गिला नहीं, 
अब कह रहे हैं मेरे जनाज़े पे बैठ कर, 
यूँ चुप हो जैसे हमसे कोई वास्ता नहीं। 

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ऐ बेवफा तेरी बेवफ़ाई में दिल बेकरार ना करूँ, 
अगर तू कह दे तो तेरा इंतेज़ार ही ना करूँ, 
तू बेवफा है तो कुछ इस कदर बेवफ़ाई कर, 
कि तेरे बाद मैं किसी से प्यार ही ना करूँ।

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ये नजर चुराने की आदत 
आज भी नही बदली उनकी, 
कभी मेरे लिए जमाने से और 
अब जमाने के लिए हमसे।

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अब भी तड़प रहा है तू उसकी याद में, 
उस बेवफा ने तेरे बाद कितने भुला दिए।

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मुझे उसके आँचल का आशियाना न मिला, 
उसकी ज़ुल्फ़ों की छाँव का ठिकाना न मिला, 
कह दिया उसने मुझको ही बेवफा... 
मुझे छोड़ने के लिए कोई बहाना न मिला।

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माना कि मोहब्बत की ये भी एक हकीकत है फिर भी, 
जितना तुम बदले हो उतना भी नहीं बदला जाता।

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इल्जाम न दे मुझको तूने ही सिखाई बेवफाई है, 
देकर के धोखा मुझे मुझको दी रुसवाई है, 
मोहब्बत में दिया जो तूने वही अब तू पाएगी, 
पछताना छोड़ दे तू भी औरों से धोखा खायेगी।

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मुझे शिकवा नहीं कुछ बेवफ़ाई का तेरी हरगिज़, 
गिला तो तब हो अगर तूने किसी से निभाई हो। 

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न जाने क्या है..? उसकी उदास आंखों में, 
वो मुँह छुपा के भी जाये तो बेवफा न लगे।
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नफरत को मोहब्बत की आँखों में देखा, 
बेरुखी को उनकी अदाओं में देखा, 
आँखें नम हुईं और मैं रो पड़ा... 
जब अपने को गैरों की बाहों में देखा।
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जिन फूलों को संवारा था 
हमने अपनी मोहब्बत से, 
हुए खुशबू के काबिल तो 
बस गैरों के लिए महके।
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चलो खेलें वही बाजी 
जो पुराना खेल है तेरा, 
तू फिर से बेवफाई करना 
मैं फिर आँसू बहाऊंगा।
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जल-जल के दिल मेरा जलन से जल रहा, 
एक अश्क मेरे आँख में मुद्दत से पल रहा, 
जिसका मैं कर रहा हूँ घुट-घुट के इंतजार, 
वो बेवफा ना आई मेरा दम निकल रहा।
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खुश हूँ कि मुझको जला के तुम हँसे तो सही, 
मेरे न सही... किसी के दिल में बसे तो सही।
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वो बेवफा हर बात पे देता है परिंदों की मिसाल, 
साफ साफ नहीं कहता मेरा शहर छोड़ दो।
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​​​​दोस्त बनकर भी वो नहीं साथ निभानेवाला, 
वही अंदाज़ है उस ज़ालिम का ज़माने वाला।
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वो कहता है... कि मजबूरियां हैं बहुत... 
साफ लफ़्ज़ों में खुद को बेवफा नहीं कहता।
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इकरार बदलते रहते है... इंकार बदलते रहते हैं, 
कुछ लोग यहाँ पर ऐसे है जो यार बदलते रहते हैं।
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इक उम्र तक मैं जिसकी जरुरत बना रहा 
फिर यूँ हुआ कि उस की जरुरत बदल गई।
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तेरे इश्क़ ने दिया सुकून इतना, 
कि तेरे बाद कोई अच्छा न लगे, 
तुझे करनी है बेवफाई तो इस अदा से कर, 
कि तेरे बाद कोई बेवफ़ा न लगे।
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हमने चाहा था जिसे उसे दिल से भुलाया न गया, 
जख्म अपने दिल का लोगों से छुपाया न गया, 
बेवफाई के बाद भी प्यार करता है दिल उनसे, 
कि बेवफाई का इल्ज़ाम भी उस पर लगाया न गया।
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लिख-लिख कर मिटा दिए 
तेरी बेवफाई के गीत, 
किया करती थी 
तू भी वफ़ा एक ज़माने में।
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मैंने कुछ इस तरह से खुद को संभाला है, 
तुझे भुलाने को दुनिया का भरम पाला है, 
अब किसी से मुहब्बत मैं कर नहीं पाता, 
इसी सांचे में एक बेवफा ने मुझे ढाला है।
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गर हमें तेरी बदनामियों का डर न होता, 
न तू वेवफा कहती... न मैं वेवफा होता।
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आज कतरा के गुजरते हुए पाया है तझे, 
बेवफाई का हुनर किसने सिखाया है तुझे।
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हसीं चेहरों के लिए आईने कुर्बान किये हैं, 
इस शौक में अपने बड़े नुकसान किये हैं,​ 
महफ़िल में मुझे गालियाँ देकर है बहुत खुश​, 
जिस शख्स पर मैंने बड़े एहसान किये है।
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उसके तर्क-ए-मोहब्बत का सबब होगा कोई, 
जी नहीं मानता कि वो बेवफ़ा पहले से था।
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मुझे तू अपना बना या न बना तेरी खुशी, 
तू ज़माने में मेरे नाम से बदनाम तो है।
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हर रात उसको इस तरह से भुलाता हूँ, 
दर्द को सीने में दबा के सो जाता हूँ। 

सर्द हवाएँ जब भी चलती हैं रात में, 
हाथ सेंकने को अपना ही घर जलाता हूँ। 

कसम दी थी उसने कभी न रोने की मुझे, 
यही वजह है कि आज भी मुस्कुराता हूँ। 

हर काम किया मैंने उसकी खुशी के लिए, 
तब भी जाने क्यों बेवफा कहलाता हूँ।
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मुझे इश्क है बस तुमसे नाम बेवफा मत देना, 
गैर जान कर मुझे इल्जाम बेवजह मत देना, 
जो दिया है तुमने वो दर्द हम सह लेंगे मगर, 
किसी और को अपने प्यार की सजा मत देना।
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वो जमाने में यूँ ही बेवफ़ा मशहूर हो गये दोस्त, 
हजारों चाहने वाले थे किस-किस से वफ़ा करते।
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क्यों मरते हो बेवफा सनम के लिए,
दो गज जमीन नही मिलेगी दफन के लिए,
मरना हे तो मरो देश-ए-वतन के लिए,
हसीना भी दुपट्टा उतार देगी कफ़न के लिए..
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ख्वाबों में बो तीर चला कर चली गई,
मैं सोया था गहरी नींद जगाकर चली गई,
मैने पूंछा चांद निकलता है किस तरह,
तो चेहरे से अपने जुल्फ हटाकर चली गई..
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मेरी आँखों में मोहब्बत की चमक आज भी है,
फिर भी मेरे प्यार पर उसको शक आज भी है,
नाव में बैठ कर धोये थे उसने हाथ कभी,
पानी में उसकी मेहँदी की महक आज भी है..
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दर्द हैं दिल में पर इसका ऐहसास नहीं होता,
रोता हैं दिल जब वो पास नहीं होता,
बरबाद हो गए हम उनकी मोहब्बत में,
और वो कहते हैं कि इस तरह प्यार नहीं होता..
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टूटे हुए प्याले में जाम नहीं आता,
इश्क़ में मरीज को आराम नहीं आता,
ये बेवफा दिल तोड़ने से पहले ये सोच तो लिया होता,
के टुटा हुआ दिल किसी के काम नहीं आता..
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कई जन्मों से तेरे पीछे चलते रहे हैं हम,
होते हुए तरल भी पिघलते रहे हैं हम।
तू हो के व्यस्त भूल गया वादे हजार कर के,
तेरी बेरुखी की आग में जलते रहे हैं हम।
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दिल से तेरी याद को जुदा तो नहीं किया,
रखा जो तुझे याद कुछ बुरा तो नहीं किया,
हम से तू नाराज़ हैं किस लिये बता जरा,
हमने कभी तुझे खफा तो नहीं किया।
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वो कह कर गई थी कि लौटकर आऊँगी,
मैं इंतजार ना करता तो क्या करता,
वो झूठ भी बोल रही थी बड़े सलीके से,
मैं एतबार ना करता तो क्या क्या करता..
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सारे रिश्ते वो मुझ से तोड़ गई,
हासिल कर के भी मुझे छोड़ गई,
मेने तो दिल दिया था अपना उसके हाथों में,
और वो शीशा समझ के तोड़ गई..
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इतना भी करम उनका कोई कम तो नहीं है,
गम देके वो पूछे हैं कोई गम तो नहीं है,
चल मान लिया तेरा कोई दोष नहीं है,
हालांकि दलीलों में तेरी दम तो नहीं है.
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मेरे अश्को से तू अपना दामन साफ कर ,
अकेले तड़पता हूँ ऐ खुदा इन्साफ कर ,
उनकी बेवफाई में कुछ राज छुपा है ,
मेरे खुदा तू उनके हर गुनाह माफ़ कर ..
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बेवफाई उसकी दिल से मिटा के आया हूँ,
ख़त भी उसके पानी में बहा के आया हूँ,
कोई पढ़ न ले उस बेवफा की यादों को,
इसलिए पानी में भी आग लगा कर आया हूँ..
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प्यार किया था तो प्यार का अंजाम कहाँ मालूम था,
वफ़ा के बदले मिलेगी बेवफाई कहाँ मालूम था,
सोचा था तैर के पार कर लेंगे प्यार के दरिया को,
पर बीच दरिया मिल जायेगा भंवर कहाँ मालूम था..
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कभी उसने भी हमें चाहत का पैगाम लिखा था,
सब कुछ उसने अपना हमारे नाम लिखा था,
सुना हैं आज उनको हमारे जिक्र से भी नफ़रत है,
जिसने कभी अपने दिल पर हमारा नाम लिखा था..
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मैंने कुछ इस तरह से खुद को संभाला है,
तुझे भुलाने को दुनिया का भरम पाला है,
अब किसी से मुहब्बत मैं नहीं कर पाता,
इसी सांचे में एक बेवफा ने मुझे ढाला है..
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दिल से रोये मगर होंठो से मुस्कुरा बेठे,
यूँ ही हम किसी से वफ़ा निभा बेठे,
वो हमे एक लम्हा न दे पाए अपने प्यार का,
और हम उनके लिये जिंदगी लुटा बेठे..
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दिल से रोये मगर होंठो से मुस्कुरा बेठे,
यूँ ही हम किसी से वफ़ा निभा बेठे,
वो हमे एक लम्हा न दे पाए अपने प्यार का,
और हम उनके लिये जिंदगी लुटा बेठे..
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हसीनो ने हसीन बनकर गुनाह किया,
औरों को तो क्या हमको भी तबाह किया,
पेश किया जब ग़ज़लों में हमने उनकी बेवफ़ाई को,
औरों ने तो क्या उन्होने भी वाह-वाह किया..
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दर्द ही सही मेरे इश्क का इनाम तो आया,
खाली ही सही हाथों में जाम तो आया,
मैं हूँ बेवफ़ा सबको बताया उसने,
यूँ ही सही, उसके लबों पे मेरा नाम तो आया।
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चाँद का क्या कसूर अगर रात बेवफा निकली,
कुछ पल ठहरी फिर चल निकली,
उनसे क्या कहे वोह तो सच्चे थे,
शायद हमारी तक़दीर ही हमसे खफा निकली..
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सब के होते हुवे भी तन्हाई मिलती हे,
यादो में भी गम की परछाई मिलती हे,
जितनी भी दुआ करते हे किसी को पाने की,
उतनी ही उनसे बेवफाई मिलती हे..
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दिल से दूर जिन्हें हम कर ना सके,
पास भी उन्हें हम कभी पा ना सके,
मिटा दिया प्यार जिसने हमारे दिल से,
हम उनका नाम लिख कर भी मिटा ना सके..
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उनकी नजर मै फर्क आज भी नही,
पहले मुड़ कर देखते थे
अब देख कर मुड़ जाते है।⁠⁠⁠⁠
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मैंने कुछ इस तरह से खुद को संभाला है,
तुझे भुलाने को दुनिया का भरम पाला है,
अब किसी से मुहब्बत मैं नहीं कर पाता,
इसी सांचे में एक बेवफा ने मुझे ढाला है..
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फ़र्ज़ था जो मेरा निभा दिया मैंने,
उसने माँगा जो वो सब दे दिया मैंने,
वो सुनके गैरों की बातें बेवफ़ा हो गयी,
समझ के ख्वाब उसको आखिर भुला दिया मैंने..
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ना पूछ मेरे सब्र की इंतेहा कहाँ तक हैं,
तू सितम कर ले, तेरी हसरत जहाँ तक हैं,
वफ़ा की उम्मीद, जिन्हें होगी उन्हें होगी,
हमें तो देखना है, तू बेवफ़ा कहाँ तक हैं..
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सुकून मिल गया मुझको बदनाम होकर,
आपके हर इक इल्ज़ाम पे यूँ बेजुबान होकर,
लोग पढ़ ही लेंगें आपकी आँखों में मेरी मोहब्बत,
चाहे कर दो इनकार अंजान होकर..
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सारे सपने तोड़कर बैठे हैं,
दिल का अरमान छोड़कर बैठे हैं,
ना कीजिये हमसे वफ़ा की बातें,
अभी-अभी दिल के टुकड़े जोड़कर बैठे हैं..
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उल्फत का अक्सर यही दस्तूर होता है,
जिसे चाहो वही अपने से दूर होता है,
दिल टूटकर बिखरता है इस कदर,
जैसे कोई कांच का खिलौना चूर-चूर होता है..
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कैसे मिलेंगे हमें चाहने वाले बताइये,
दुनिया खड़ी है राह में दीवार की तरह,
वो बेवफ़ाई करके भी शर्मिंदा ना हुए,
सजाएं मिली हमें गुनहगार की तरह..
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कभी उसने भी हमें चाहत का पैगाम लिखा था,
सब कुछ उसने अपना हमारे नाम लिखा था,
सुना हैं आज उनको हमारे जिक्र से भी नफ़रत है,
जिसने कभी अपने दिल पर हमारा नाम लिखा था..
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तेरी बेरुखी को भी रुतबा दिया हमने ,
तेरे प्यार का हर क़र्ज़ अदा किया हमने ,
मत सोच के हम भूल गए है तुझे ,
आज भी खुदा से पहले याद किया है तुझे..
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जब कुछ सपने अधूरे रह जाते हैं,
तब दिल के दर्द आँसू बनकर बह जाते हैं,
जो कहते है की हम सिर्फ आपके है,
पता नहीं वो कैसे अलविदा कह जाते है..
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टूटे हुए दिल ने भी उसके लिए दुआ मांगी,
मेरी साँसों ने हर पल उसकी ख़ुशी मांगी,
न जाने कैसी दिल्लगी थी उस बेवफा से,
के मैंने आखिरी ख्वाहिश में भी उसकी वफ़ा मांगी..
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अगर दुनिया में जीने की चाहत ना होती,
तो खुदा ने मोहब्बत बनाई ना होती,
लोग मरने की आरज़ू ना करते,
अगर मोहब्बत में बेवाफ़ाई ना होती,
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जिस किसीको भी चाहो वोह बेवफा हो जाता है,
सर अगर झुकाओ तो सनम खुदा हो जाता है,
जब तक काम आते रहो हमसफ़र कहलाते रहो,
काम निकल जाने पर हमसफ़र कोई दूसरा हो जाता है…
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इस कदर हम यार को मनाने निकले,
उसकी चाहत के हम दिवाने निकले,
जब भी उसे दिल का हाल बताना चाहा,
उसके होठों से वक़्त न होने के बहाने निकले..
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मैं शिकायते भी किससे करूँ,
सब किस्मतों की बात है,
तेरी सोच में भी नहीं हूँ मैं,
मुझे लफ्ज़ लफ्ज़ तू याद हैं..
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मुहब्बत में क्यों वेब्फ़ाइ होती है,
सुना था प्यार में गहराई होती है,
टूट कर चाहने वाले के नसीब में,
क्यों सिर्फ फिर तन्हाई होती है..
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मुझे फिर तबाह कर मुझे फिर रुला जा,
सितम करने वाले कहीं से तू आजा,
आँखों में तेरी ही सूरत बसी है,
तेरी ही तरह तेरा ग़म भी हंसीं है..
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आग दिल मे लगी जब वो खफा हुए,
महसूस हुआ तब, जब वो जुदा हुए,
कर के वफ़ा कुछ दे ना सके वो ,
पर बहुत कुछ दे गये जब वो बेवफा हुए..

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कभी ग़म तो कभी तन्हाई मार गयी,
कभी याद आ कर उनकी जुदाई मार गयी,
बहुत टूट कर चाहा जिसको हमने,
आखिर में उनकी ही बेवफाई मार गयी..

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हम ने सीने से लगाया,
दिल न अपना बन सका,
मुस्कुरा कर तुम ने देखा,
दिल तुम्हारा हो गया…

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भुला के मुझको अगर तुम भी हो सलामत,
तो भुला के तुझको संभलना मुझे भी आता है,
नहीं है मेरी फितरत में ये आदत वरना,
तेरी तरह बदलना मुझे भी आता है..

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मेरे खवाबो मे आना आपका कसूर था,
आपसे दिल लगाना हमारा कसूर था,
आप आए थे जिन्दगी मे पल दो पल के लिए,
आपको जिन्दगी समझ लेना हमारा कसूर था..

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अपनी खुशीयां लुटा कर उसपर कुर्बान हो जाऊ,
काश कुछ दिन उसके शहर का मेहमान हो जाऊ,
वो अपना नायाब दिल मुझको देदे,
और फिर वापस मांगे, मैं मुकर जाऊ और बेईमान हो जाऊ..

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तेरी दोस्ती ने दिया सकूं इतना,
की तेरे बाद कोई अच्छा न लगे,
तुझे करनी है बेवफ़ाई तो इस अदा से कर,
कि तेरे बाद कोई भी बेवफ़ा न लगे।

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दुनिया में किसी से कभी प्यार मत करना,
अपने अनमोल आँसू इस तरह बेकार मत करना,
कांटे तो फिर भी दामन थाम लेते हैं,
फूलों पर कभी इस तरह तुम ऐतबार मत करना..

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कोई हुनर, कोई राज,
कोई रविश, कोई तो तरीका बताओ
दिल टूटे भी ना, साथ छूटे भी ना,
कोई रुठे भी ना और जिदंगी गुजर जाए..

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आग दिल में लगी जब वो खफ़ा हुए,
महसूस हुआ तब, जब वो जुदा हुए,
करके वफ़ा कुछ दे ना सके वो,
पर बहुत कुछ दे गए जब वो बेवफ़ा हुए!

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जिंदगी में कभी ऐसा मोड़ आएगा सोचा ना था,
जिसके लिए जीती हूँ वो छोड़ जाएगा सोचा ना था,
सच्ची मोहब्बत की थी मैंने कोई खिलवाड़ नहीं था,
बदले में वो रिश्ता तोड़ जाएगा सोचा ना था…

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आपकी नशीली यादों में डूबकर,
हमने इश्क की गहराई को समझा,
आप तो दे रहे थे धोखा और,
हमने जानकर भी कभी आपको बेवफा न समझा।

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क्यों आए मेरी जिंदगी में गर जाना ही था,
क्यों हँसाया मुझे गर रूलाना ही था,
क्या मैंने कहा था के मुझे तुम्हारी जरूरत है आओ पास मेरे,
क्यों पास आए गर दूरियों को बढ़ाना ही था..

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न वो सपना देखो जो टूट जाये,
न वो हाथ थामो जो छूट जाये,
मत आने दो किसी को करीब इतना,
कि उसके दूर जाने से इंसान खुद से रूठ जाये।

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उन लोगों का क्या हुआ होगा,
जिनको मेरी तरह गम ने मारा होगा,
किनारे पर खड़े लोग क्या जाने,
डूबने वाले ने किस किस को पुकारा होगा।।

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हाथ पकड़ कर रोक लेते अगर,
तुझपर ज़रा भी ज़ोर होता मेरा,
ना रोते हम यूँ तेरे लिये,
अगर हमारी ज़िन्दगी में तेरे सिवा कोई ओर होता..

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चाँद की रातों मे सारा जँहा सोता है,
लेकिन किसी की यादों मे कोई बदनसीब रोता हैं,
खुदा किसी को मुहब्त पे फिदा न करे,
अगर करे तो किसी को जुदा न करें।

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हादसोँ के गवाह हम भी हैँ,
अपने दिल से तबाह हम भी हैँ,
जुर्म के बिना सजा ए मौत मिली,
ऐसे ही एक बेगुनाह हम भी हैँ..!!

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जीने की ख्वाहिश में हर रोज़ मरते हैं,
वो आये न आये हम इंतज़ार करते हैं,
झूठा ही सही मेरे यार का वादा है,
हम सच मान कर ऐतबार करते हैं..

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टूटे हुए दिल ने भी उसके लिए दुआ मांगी,
मेरी साँसों ने हर पल उसकी ख़ुशी मांगी,
न जाने कैसी दिल्लगी थी उस बेवफा से,
के मैंने आखिरी ख्वाहिश में भी उसकी वफ़ा मांगी..

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घर बना कर मेरे दिल में, वो चली गई है,
ना खुद रहती है, ना किसी और को बसने देती है..

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दो कदम चलकर अक्सर हम रुक जाया करते है ,
क्यों इंतजार रहता है उनका,
जो राह में छोड़कर चले जाया करते है।।

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दर्द है दिल में पर इसका एहसास नहीं होता;
रोता है दिल जब वो पास नहीं होता;
बर्बाद हो गए हम उसके प्यार में;
और वो कहते हैं इस तरह प्यार नहीं होता…

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तुम बताओ तो मुझे किस बात की सजा देते हो।
मंदिर में आरती और महफ़िल में शमां कहते हो।
मेरी किस्मत में भी क्या है लोगो जरा देख लो,
तुम या तो मुझे बुझा देते हो या फिर जला देते हो..

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खामोशी से बिखरना आ गया है,
हमें अब खुद उजड़ना आ गया है,
किसी को बेवफा कहते नहीं हम,
हमें भी अब बदलना आ गया है,
किसी की याद में रोते नहीं हम,
हमें चुपचाप जलना आ गया है,
गुलाबों को तुम अपने पास ही रखो,
हमें कांटों पे चलना आ गया है|

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तक़दीर ने हमें आज़माया बहुत
हमने उसे मनाया बहुत
जिसकी ज़िंदगी ख़ुशियों से सजा दी
उसी शख़्स नें हमें रुलाया बहुत

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पल पल उसका साथ निभाते हम
एक इशारे पर दुनिया छोड जाते हम
समदर के बीच मै पहुचॅ कर फरेब किया उसने
वो कहता तो किनारे पर ही डूब जाते हम

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मेरा यूँ टुटना और टूटकर बिखर जाना
कोई इत्फाक नहीं,
किसी ने बहुत कोशिश की है
मुझे इस हाल तक पहुँचाने में…

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छोड़ दिया हमने उसका दीदार करना
हमेशा के लिए…
जिसको प्यार की कदर ना हो
उसे मुड़ मुड़ के क्या देखना…..!!

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इतनी शिद्दत से चाहा जाए
तो पत्थर भी अपने हो जाते हैं

ऐ खुदा..

न जाने ये मिट्टी का इनसान
इतना मगरूर क्यों होता है
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मोहब्बत का मेरा सफर आखिरी है,
ये कागज, कलम ये गजल आखिरी है,
मैं फिर मिलूं ना मिलूं कहीं ढूंढ लेना,
तेरे दर्द का ये असर आखिरी है।

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ना पूछ मेरे सब्र की इंतेहा कहाँ तक हैं,
तू सितम कर ले, तेरी हसरत जहाँ तक हैं
वफ़ा की उम्मीद, जिन्हें होगी उन्हें होगी,
हमें तो देखना है, तू बेवफ़ा कहाँ तक हैं.

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एक दिन ऐसा आएगा सल्तनत भी मेरी होगी
और ‪हुकूमत‬ भी मेरी होगी
बस फर्क सिर्फ इतना होगा कि वहाँ
राजा मै होऊँगा और मुजरे_वाली तू होगी

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टूटे हुए दिल ने भी उसके लिए दुआ मांगी,
मेरी साँसों ने हर पल उसकी ख़ुशी मांगी,
न जाने कैसी दिल्लगी थी उस बेवफा से,
के मैंने आखिरी ख्वाहिश में भी उसकी वफ़ा मांगी

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मौसम मे जुदाई के गर तेरा दीदार हो जाये ।
तो मेरा दिल भी सनम तेरा कर्जदार हो जाये ।
तुम जो छोङ कर गये हो हमको तन्हां,
है बद्दुवा मेरी की तुम को भी प्यार हो जाये ॥

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वादा-ए-वफ़ा करो तो
फिर खुद को फ़ना करो,
वरना खुदा के लिए
किसी की ज़िंदगी ना तबाह करो

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कौन कहता है हम उसके बिना मर जायेंगे
हम तो दरिया है समंदर में उतर जायेंगे
वो तरस जायेंगे प्यार की एक बून्द के लिए
हम तो बादल है प्यार के किसी और पर बरस जायेंगे|

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प्यार में वो हम को बेपनाह कर गये,
फिर ज़िनदगीं में हम को तन्नहा कर गये,
चाहत थी उनके इश्क में फ़नाह होने की,
पर वो लौट कर आने को,भी मना कर गये..

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सुकून ऐ दिल के लिए कभी
हाल ही पूँछ लिया करो…
मालूम तो हमें भी है कि हम
आपके अब कुछ नहीं लगते..

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तेरे जाने से कुछ नही बदला,
बस पहले जहां दिल होता था,
अब वहां दर्द होता है

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ज़रा सी बात पे ना छोड़ना किसी का दामन
उम्रें बीत जाती हैं दिल का रिश्ता बनाने में ….

मुझसे ‘नफरत’ तभी करना
जब आप मेरे बारे मे ‘सबकुछ’ जानते हो
तब नहीं जब किसी से ‘कुछ’ सुना हो ।

मैं कई अपनों से वाक़िफ़ हूँ
जो पत्थर के बने हैं !!!
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